Saturday, December 8, 2018



"मेरा जहां भी तुम्हीं हो,
मेरी हर खुशी भी तुम्हीं हो,
इश्क़ की गलियों में खो गए है हम,
मेरी हर ग़ज़ल ही तुम्हीं हो,

क्या इश्क़ करना गुना है एक,
जो खुदा की रहमत होती है,
इतनी बेवफाई के मंजरो को पार करने के बाद भी,
मेरी इश्क़ ऐ मोहब्बत भी तुम्हीं हो,

भुला तो ना सके हम तुम्हे,
इन कोरे पन्नों की स्याही में रंगते हुए,
कितना ही भुला ले तुम्हे ,
मेरी एक ही चाहत है वो भी तुम्हीं हो,

शायद गुना कोई किया होगा हमने ,
ये उसकी सजा है जो इस दिल को मिल रही,
जी तो लेगे तेरे बिना इस जहां में,
क्यों कि जिंदगी जीने का मकसद ही तुम्हीं हो।"

- शुभम 

"Yaari to bas Tabassum ki hi talash rakhti h,
 esse to falak tak le jane wale musafir chahiye"

"यारी तो बस तबस्सुम की ही तलाश रखती है,
 इसे तो फलक तक ले जाने वाला मुसाफिर चाहिए. "

-शुभम पांथरी 

"ज़िन्दगी का मुस्तक़बिल की ताबीर कराने वाले खूब है जहाँ मे, 
हम तो क़ासिड है जिसे तलाश है उस रहनुमा की, जो जिंदगी की खूबसूरती की क़ुरबत से ताबीर करना सीखा दे "

 - शुभम पांथरी 
                            "मां"


"इस कलयुग में ईश्वर का रूप है मां,
पहला कदम जो चलना सिखाती है मां,
अपने आंचल में धूप से बचाती है मां,
 खुशी से अपने निवाले को भी अपनी औलाद को देती है मां,
 मुश्किल राह में भी साथ होती है मां,
 हार में भी जीतने का हौसला है मां,
 दर्द में भी तुम्हे हसना सिखाती है मां,
 इस कलयुग में ईश्वर का रूप है मां,"

-शुभम  पांथरी



"Jo pal anayat se guzare ishq ki inayat karte hue,
Kya kare esii ebaadat ka jo ishq ki  ruhaniyat na dila sake"

"जो पल अनायत से गुजारे इश्क़ की इनायत करते हुए,
क्या करे ऐसी इबादत का जो इश्क़ की रूहानियत ना दिला सके।"

- शुभम