"मेरा जहां भी तुम्हीं हो,
मेरी हर खुशी भी तुम्हीं हो,
इश्क़ की गलियों में खो गए है हम,
मेरी हर ग़ज़ल ही तुम्हीं हो,
क्या इश्क़ करना गुना है एक,
जो खुदा की रहमत होती है,
इतनी बेवफाई के मंजरो को पार करने के बाद भी,
मेरी इश्क़ ऐ मोहब्बत भी तुम्हीं हो,
भुला तो ना सके हम तुम्हे,
इन कोरे पन्नों की स्याही में रंगते हुए,
कितना ही भुला ले तुम्हे ,
मेरी एक ही चाहत है वो भी तुम्हीं हो,
शायद गुना कोई किया होगा हमने ,
ये उसकी सजा है जो इस दिल को मिल रही,
जी तो लेगे तेरे बिना इस जहां में,
क्यों कि जिंदगी जीने का मकसद ही तुम्हीं हो।"
- शुभम
मेरी हर खुशी भी तुम्हीं हो,
इश्क़ की गलियों में खो गए है हम,
मेरी हर ग़ज़ल ही तुम्हीं हो,
क्या इश्क़ करना गुना है एक,
जो खुदा की रहमत होती है,
इतनी बेवफाई के मंजरो को पार करने के बाद भी,
मेरी इश्क़ ऐ मोहब्बत भी तुम्हीं हो,
भुला तो ना सके हम तुम्हे,
इन कोरे पन्नों की स्याही में रंगते हुए,
कितना ही भुला ले तुम्हे ,
मेरी एक ही चाहत है वो भी तुम्हीं हो,
शायद गुना कोई किया होगा हमने ,
ये उसकी सजा है जो इस दिल को मिल रही,
जी तो लेगे तेरे बिना इस जहां में,
क्यों कि जिंदगी जीने का मकसद ही तुम्हीं हो।"
- शुभम
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