"मां"
"इस कलयुग में ईश्वर का रूप है मां,
पहला कदम जो चलना सिखाती है मां,
अपने आंचल में धूप से बचाती है मां,
खुशी से अपने निवाले को भी अपनी औलाद को देती है मां,
मुश्किल राह में भी साथ होती है मां,
हार में भी जीतने का हौसला है मां,
दर्द में भी तुम्हे हसना सिखाती है मां,
-शुभम पांथरी
"इस कलयुग में ईश्वर का रूप है मां,
पहला कदम जो चलना सिखाती है मां,
अपने आंचल में धूप से बचाती है मां,
खुशी से अपने निवाले को भी अपनी औलाद को देती है मां,
मुश्किल राह में भी साथ होती है मां,
हार में भी जीतने का हौसला है मां,
दर्द में भी तुम्हे हसना सिखाती है मां,
इस कलयुग में ईश्वर का रूप है मां,"
-शुभम पांथरी
No comments:
Post a Comment